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भक्ति

आरती संग्रह

सभी प्रमुख देवी-देवताओं की पारम्परिक आरती, शुद्ध हिंदी में। पूजा-अर्चना के समय इन आरतियों का पाठ करें।

श्री गणेश की आरती

जय गणेश जय गणेश देवा

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श्री शिव की आरती

ॐ जय शिव ओंकारा

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श्री विष्णु (जगदीश) की आरती

ॐ जय जगदीश हरे

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श्री लक्ष्मी की आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता

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श्री दुर्गा (अम्बे माँ) की आरती

जय अम्बे गौरी

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श्री सरस्वती की आरती

जय सरस्वती माता

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श्री हनुमान की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की

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श्री कृष्ण की आरती

आरती कुंजबिहारी की

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श्री राम की आरती

आरती श्री रामायण जी की

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श्री संतोषी माता की आरती

जय संतोषी माता

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श्री शनि देव की आरती

जय जय श्री शनिदेव

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श्री सूर्य देव की आरती

ॐ जय सूर्य भगवान

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श्री विश्वकर्मा की आरती

जय श्री विश्वकर्मा

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श्री राधा की आरती

आरती श्री वृषभानु लली की

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श्री साईं बाबा की आरती

आरती साईं बाबा

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श्री पार्वती की आरती

जय पार्वती माता

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श्री वैष्णो देवी (शेरावाली) की आरती

अम्बे तू है जगदम्बे काली

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श्री महाकाली की आरती

जय काली माता

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श्री गंगा माता की आरती

ॐ जय गंगे माता

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श्री तुलसी माता की आरती

जय जय तुलसी माता

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श्री कार्तिकेय (मुरुगन) की आरती

जय जय आरती कार्तिक स्वामी

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श्री भैरव बाबा की आरती

जय भैरव देवा

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श्री खाटू श्याम की आरती

ॐ जय श्री श्याम हरे

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श्री यमुना माता की आरती

ॐ जय यमुना माता

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श्री जगन्नाथ की आरती

जय जगन्नाथ स्वामी

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सामान्य प्रश्न

आरती कब गाई जाती है? +

आरती पूजा के अन्त में गाई जाती है। सुबह और शाम दोनों समय मन्दिरों और घरों में आरती की जाती है। दीपक या कपूर की ज्योत से देवता के समक्ष आरती उतारी जाती है।

आरती में दीपक क्यों जलाते हैं? +

दीपक अज्ञान का अन्धकार मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाने का प्रतीक है। घी या तेल का दीपक जलाकर देवता के सम्मुख घुमाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और वातावरण शुद्ध होता है।

क्या आरती हिंदी के अलावा किसी और भाषा में भी होती है? +

हाँ, मराठी, गुजराती, बंगाली, तमिल आदि क्षेत्रीय भाषाओं में भी आरतियाँ प्रचलित हैं। यहाँ सबसे अधिक प्रचलित हिंदी आरतियाँ दी गई हैं जो पूरे उत्तर भारत में गाई जाती हैं।

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