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आरती

श्री गणेश की आरती

जय गणेश जय गणेश देवा

टेक (हर पद के बाद दोहराएँ)

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

पद 1

एकदन्त दयावन्त चार भुजा धारी। माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी॥

पद 2

पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा॥

पद 3

अन्धन को आँख देत कोढ़िन को काया। बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥

पद 4

दीनन की लाज राखो शम्भु सुतवारी। कामना को पूर्ण करो जय बलिहारी॥

पद 5

'सूर' श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

सामान्य प्रश्न

श्री गणेश की आरती कब गाई जाती है? +

श्री गणेश की आरती पूजा के अन्त में गाई जाती है, सुबह या शाम दोनों समय। दीपक या कपूर की ज्योत से देवता के समक्ष आरती उतारी जाती है।

श्री गणेश की आरती का टेक क्या है? +

श्री गणेश की आरती का टेक है: "जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।", जिसे हर पद के बाद दोहराया जाता है।

क्या श्री गणेश की आरती पूरी हिंदी में उपलब्ध है? +

हाँ, इस पृष्ठ पर श्री गणेश की आरती के सभी 5 पद पूरे हिंदी में दिए गए हैं।

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