आरती
श्री जगन्नाथ की आरती
जय जगन्नाथ स्वामी
टेक (हर पद के बाद दोहराएँ)
जय जगन्नाथ स्वामी, नयन पथ गामी। भव पीड़ा हरने वाले, हे अन्तर्यामी॥
पद 1
नील पर्वत सम तन सोहे, हे नीलाचल वासी। सुभद्रा बलराम संग, प्रभु पुरी के अधिवासी॥
पद 2
रथ यात्रा में विराजो, भक्तों को दर्शन दो। दीन जनों के नाथ प्रभु, हम पर कृपा दो॥
पद 3
चक्र नयन तुम्हारे, विश्व पालनहारे। दास तुम्हारे द्वारे, हे प्रभु दयासागर हारे॥
पद 4
जगन्नाथ की आरती, जो कोई नर गावे। मोक्ष मुक्ति पावे, प्रभु दर्शन पावे॥
सामान्य प्रश्न
श्री जगन्नाथ की आरती कब गाई जाती है? +
श्री जगन्नाथ की आरती पूजा के अन्त में गाई जाती है, सुबह या शाम दोनों समय। दीपक या कपूर की ज्योत से देवता के समक्ष आरती उतारी जाती है।
श्री जगन्नाथ की आरती का टेक क्या है? +
श्री जगन्नाथ की आरती का टेक है: "जय जगन्नाथ स्वामी, नयन पथ गामी।", जिसे हर पद के बाद दोहराया जाता है।
क्या श्री जगन्नाथ की आरती पूरी हिंदी में उपलब्ध है? +
हाँ, इस पृष्ठ पर श्री जगन्नाथ की आरती के सभी 4 पद पूरे हिंदी में दिए गए हैं।
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