भक्ति
मंत्र संग्रह
वेदों और पुराणों से लिए गए मंत्र, हर मंत्र के साथ संस्कृत श्लोक, उच्चारण में सहायक ट्रांसलिटरेशन और सरल अर्थ। जानिए कौन सा मंत्र कब और क्यों जपा जाता है।
शिव मंत्र
महामृत्युंजय मंत्र
भगवान शिव
रोग, भय और अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए जपा जाने वाला संजीवनी मंत्र।
पूरा मंत्र और अर्थ पढ़ें →शिव वंदना
भगवान शिव
शिव की शांत और करुणामयी छवि का ध्यान करने वाला स्तोत्र।
पूरा मंत्र और अर्थ पढ़ें →ॐ नमः शिवाय
भगवान शिव
शैव परंपरा का पंचाक्षरी मंत्र, शिव के प्रति सरल और गहन समर्पण का भाव।
पूरा मंत्र और अर्थ पढ़ें →विष्णु मंत्र
विष्णु वंदना
भगवान विष्णु
शांति, संरक्षण और स्थिरता के लिए विष्णु की स्तुति।
पूरा मंत्र और अर्थ पढ़ें →ॐ नमो नारायणाय
भगवान नारायण (विष्णु)
वैष्णव परंपरा का अष्टाक्षरी मंत्र, नारायण की शरण और रक्षा की कामना करता है।
पूरा मंत्र और अर्थ पढ़ें →ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
भगवान वासुदेव (कृष्ण/विष्णु)
भागवत परंपरा का द्वादशाक्षरी मंत्र, वासुदेव को समस्त प्राणियों की अंतरात्मा मानकर नमन करता है।
पूरा मंत्र और अर्थ पढ़ें →लक्ष्मी मंत्र
सरस्वती मंत्र
कृष्ण मंत्र
हनुमान मंत्र
कार्तिकेय मंत्र
नित्य मंत्र
भोजन मंत्र
अन्नदेवता
भोजन से पहले कृतज्ञता व्यक्त करने और भोजन को पवित्र मानने के लिए बोला जाने वाला मंत्र।
पूरा मंत्र और अर्थ पढ़ें →प्रातः स्मरण
लक्ष्मी, सरस्वती, गोविंद और धरती माता
नींद से उठते ही अपने हाथों और धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वाला मंत्र।
पूरा मंत्र और अर्थ पढ़ें →रात्रि प्रार्थना (क्षमा प्रार्थना)
भगवान शिव
सोने से पहले दिनभर की जाने-अनजाने गलतियों के लिए क्षमा माँगने का मंत्र।
पूरा मंत्र और अर्थ पढ़ें →स्नान मंत्र
सप्त पवित्र नदियाँ
स्नान करते समय सात पवित्र नदियों का आह्वान करने वाला मंत्र।
पूरा मंत्र और अर्थ पढ़ें →दीप मंत्र
दीपज्योति
पूजा में दीपक जलाते समय बोला जाने वाला मंत्र, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए।
पूरा मंत्र और अर्थ पढ़ें →प्रभात स्मरण
त्रिदेव और नवग्रह
ब्रह्मा, विष्णु, शिव और नवग्रहों का स्मरण करते हुए शुभ प्रभात की कामना करने वाला मंत्र।
पूरा मंत्र और अर्थ पढ़ें →शांति मंत्र
शांति मंत्र
ईश्वर
सामूहिक शांति, सद्भाव और कल्याण की कामना करने वाला मंत्र, हर पाठ या पूजा के अंत में बोला जाता है।
पूरा मंत्र और अर्थ पढ़ें →पूर्णमदः शांति मंत्र
ब्रह्म
ईशावास्य उपनिषद का आरंभिक मंत्र, ब्रह्म की अनंत और अखंड प्रकृति का बोध कराता है।
पूरा मंत्र और अर्थ पढ़ें →असतो मा सद्गमय
ब्रह्म
बृहदारण्यक उपनिषद की यह प्रार्थना अज्ञान से ज्ञान और मृत्यु-भय से अमरता की ओर ले जाने की कामना करती है।
पूरा मंत्र और अर्थ पढ़ें →द्यौः शान्तिः मंत्र
ईश्वर
आकाश, पृथ्वी, जल, वनस्पति और समस्त सृष्टि में शांति की कामना करने वाला वैदिक शांति पाठ।
पूरा मंत्र और अर्थ पढ़ें →उपनिषद और वेदांत
ईशावास्यम् मंत्र
ब्रह्म
ईशावास्य उपनिषद का पहला श्लोक, त्याग भाव से जीवन जीने और लोभ से दूर रहने की शिक्षा देता है।
पूरा मंत्र और अर्थ पढ़ें →निर्वाणाष्टकम्
भगवान शिव / आत्मा
आदि शंकराचार्य रचित यह स्तोत्र आत्मा की शुद्ध, असीम प्रकृति का बोध कराता है, "मैं शिव हूँ" के भाव में।
पूरा मंत्र और अर्थ पढ़ें →तैत्तिरीय उपनिषद दीक्षा मंत्र
गुरु / माता-पिता
तैत्तिरीय उपनिषद की यह शिक्षा सत्य, धर्म और माता-पिता-गुरु-अतिथि के सम्मान की नींव रखती है।
पूरा मंत्र और अर्थ पढ़ें →सामान्य प्रश्न
मंत्र और श्लोक में क्या अंतर है? +
मंत्र एक ध्वनि-सूत्र है जिसे बार-बार जपा जाता है और जिसका विशेष आध्यात्मिक प्रभाव माना जाता है, जैसे गायत्री मंत्र। श्लोक एक छंदबद्ध पद्य है, जो किसी देवता की स्तुति या उपदेश का वर्णन करता है। कई स्तुतियाँ श्लोकों में होती हैं, पर मंत्र की तरह जपी भी जाती हैं।
मंत्र जपने का सही तरीका क्या है? +
स्नान के बाद स्वच्छ स्थान पर बैठें, मन शांत रखें, और उच्चारण स्पष्ट रखें। शुरुआत में संख्या से ज़्यादा ध्यान शुद्ध उच्चारण और भाव पर दें। इस पृष्ठ पर हर मंत्र के साथ दी गई ट्रांसलिटरेशन उच्चारण में सहायक है।
क्या ये मंत्र किसी विशेष परंपरा से जुड़े हैं? +
यहाँ दिए गए मंत्र वेदों, पुराणों और सामान्य हिंदू पूजा-परंपरा से लिए गए हैं, और भारत में हर क्षेत्र और संप्रदाय में व्यापक रूप से प्रचलित हैं।
अपनी कुंडली जानें
जन्म विवरण भरें: स्कोर मुफ़्त में मिलेगा। पूरी रिपोर्ट आपके ईमेल पर भेजी जाएगी।
सटीक खगोलीय गणना · कोई स्पैम नहीं · गोपनीयता