आरती
श्री शिव की आरती
ॐ जय शिव ओंकारा
टेक (हर पद के बाद दोहराएँ)
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्धांगी धारा॥
पद 1
एकानन चतुरानन पंचानन राजे। हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥
पद 2
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे। तीनों रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥
पद 3
अक्षमाला वनमाला रुण्डमाला धारी। चन्दन मृगमद सोहे भाले शशिधारी॥
पद 4
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे। सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥
पद 5
कर में श्रेष्ठ कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी। सुखकारी दुःखहारी जगपालनकारी॥
पद 6
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका। प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका॥
पद 7
त्रिगुण स्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥
सामान्य प्रश्न
श्री शिव की आरती कब गाई जाती है? +
श्री शिव की आरती पूजा के अन्त में गाई जाती है, सुबह या शाम दोनों समय। दीपक या कपूर की ज्योत से देवता के समक्ष आरती उतारी जाती है।
श्री शिव की आरती का टेक क्या है? +
श्री शिव की आरती का टेक है: "ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।", जिसे हर पद के बाद दोहराया जाता है।
क्या श्री शिव की आरती पूरी हिंदी में उपलब्ध है? +
हाँ, इस पृष्ठ पर श्री शिव की आरती के सभी 7 पद पूरे हिंदी में दिए गए हैं।
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