आरती
श्री संतोषी माता की आरती
जय संतोषी माता
टेक (हर पद के बाद दोहराएँ)
जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता। अपने सेवक जन की, सुख सम्पत्ति दाता॥
पद 1
सुन्दर चीर सुनहरी, माँ धारण कीन्हा। हीरा पन्ना दमके, माँ मोतिन का हार॥
पद 2
गेरू लाल छटा छवि, माँ बदन पे छाई। भक्तों की दुख हरनी, माँ जगत सुखदाई॥
पद 3
कानों में कुण्डल शोभे, माँ नासाग्रे मोती। कोटि कोटि भानु शशि, माँ राजत है ज्योती॥
पद 4
स्वर्ण सिंहासन बैठीं, माँ चँवर ढुराये। पवन सहित झूलत हैं, माँ भक्तन मन भाये॥
पद 5
गुड़ चना का भोग, माँ तुमको लगता। शुक्रवार को पूजे, माँ मन हरषाता॥
पद 6
सन्तोषी माता की आरती, जो कोई जन गावे। ऋद्धि सिद्धि सुख सम्पत्ति, जी भर के पावे॥
सामान्य प्रश्न
श्री संतोषी माता की आरती कब गाई जाती है? +
श्री संतोषी माता की आरती पूजा के अन्त में गाई जाती है, सुबह या शाम दोनों समय। दीपक या कपूर की ज्योत से देवता के समक्ष आरती उतारी जाती है।
श्री संतोषी माता की आरती का टेक क्या है? +
श्री संतोषी माता की आरती का टेक है: "जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता।", जिसे हर पद के बाद दोहराया जाता है।
क्या श्री संतोषी माता की आरती पूरी हिंदी में उपलब्ध है? +
हाँ, इस पृष्ठ पर श्री संतोषी माता की आरती के सभी 6 पद पूरे हिंदी में दिए गए हैं।
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