वैदिक कैलेंडर
आज का पंचांग
आज के पंचांग के पाँचों अंग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। सटीक खगोलीय गणना, आपके शहर के अनुसार।
पंचांग क्या है?
पंचांग वैदिक कैलेंडर का आधार है जिसमें पाँच अंग होते हैं: तिथि (चंद्र दिन), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्रमा की स्थिति), योग (सूर्य-चंद्र योग) और करण (आधा तिथि)। इन पाँचों का ज्ञान किसी भी शुभ कार्य के लिए आवश्यक है।
तिथि
चंद्रमा और सूर्य के बीच का कोण, हर 12° पर एक नई तिथि।
वार
सप्ताह का दिन, हर दिन का एक ग्रह स्वामी होता है।
नक्षत्र
चंद्रमा की वर्तमान स्थिति 27 नक्षत्रों में से।
योग
सूर्य और चंद्रमा की देशांश राशियों का योग।
करण
आधी तिथि। हर दिन दो करण होते हैं।
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सामान्य प्रश्न
पंचांग से जुड़े सवाल
पंचांग रोज़ क्यों बदलता है? +
तिथि, नक्षत्र, योग और करण, चारों चंद्रमा और सूर्य की चाल पर निर्भर करते हैं, जो हर दिन थोड़ा आगे बढ़ते हैं। इसलिए पंचांग रोज़, और शहर बदलने पर भी, बदल जाता है।
क्या पंचांग शहर के अनुसार अलग होता है? +
हां। तिथि और नक्षत्र के बदलने का सटीक समय शहर के अक्षांश, देशांश और समय क्षेत्र पर निर्भर करता है, इसलिए दो शहरों में एक ही दिन थोड़ा अलग पंचांग दिख सकता है।
शुभ मुहूर्त तय करने में पंचांग का क्या काम है? +
कोई भी शुभ मुहूर्त पंचांग के पाँचों अंगों को मिलाकर तय होता है। जैसे रिक्ता तिथि या भद्रा करण में नए काम टाले जाते हैं। पूरा विवाह मुहूर्त निकालने के लिए हमारी मुहूर्त सेवा देखें।
तिथि, नक्षत्र, योग और करण के आगे "तक HH:MM" का क्या अर्थ है? +
यह उस अंग का समाप्ति समय है, यानी वर्तमान तिथि/नक्षत्र/योग/करण उसी समय तक चलेगा, फिर अगला शुरू हो जाएगा। समय आपके चुने शहर के समय क्षेत्र में दिखाया गया है। वार का "समाप्ति" स्थानीय आधी रात है, इसलिए वार के आगे यह नहीं दिखता।
विक्रम साम्वत और शक साम्वत में क्या अंतर है? +
दोनों भारतीय पंचांग-वर्ष हैं, बस शुरुआत अलग है। विक्रम साम्वत ग्रेगोरियन वर्ष से 57 वर्ष आगे है (2026-27 = विक्रम 2083); शक साम्वत ग्रेगोरियन से 78 वर्ष पीछे है (2026 = शक 1948)। दोनों में नया वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को शुरू होता है, जो मार्च या अप्रैल में पड़ता है।