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आरती

श्री महाकाली की आरती

जय काली माता

टेक (हर पद के बाद दोहराएँ)

जय काली माता, माँ जय काली माता। दुष्ट दलन अघहारिणी, शिव प्रिय जगमाता॥

पद 1

तेरे तेज से थर थर काँपे, अरि दल भारी। मुण्ड माल तन पर सोहे, खप्पर तलवार धारी॥

पद 2

दक्षिण काली भद्रकाली, कालरात्रि कहलाती। सृष्टि की तू जननी माता, संहार की भी दाता॥

पद 3

रक्तबीज तूने संहारा, दैत्य दलन कर डाला। देव देवता तुझको ध्यावें, तू सबकी रखवाला॥

पद 4

माँ काली की आरती, जो कोई नर गावे। भय संकट सब दूर हों, मनवांछित फल पावे॥

सामान्य प्रश्न

श्री महाकाली की आरती कब गाई जाती है? +

श्री महाकाली की आरती पूजा के अन्त में गाई जाती है, सुबह या शाम दोनों समय। दीपक या कपूर की ज्योत से देवता के समक्ष आरती उतारी जाती है।

श्री महाकाली की आरती का टेक क्या है? +

श्री महाकाली की आरती का टेक है: "जय काली माता, माँ जय काली माता।", जिसे हर पद के बाद दोहराया जाता है।

क्या श्री महाकाली की आरती पूरी हिंदी में उपलब्ध है? +

हाँ, इस पृष्ठ पर श्री महाकाली की आरती के सभी 4 पद पूरे हिंदी में दिए गए हैं।

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