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आरती

श्री राधा की आरती

आरती श्री वृषभानु लली की

टेक (हर पद के बाद दोहराएँ)

आरती श्री वृषभानु लली की। मोहन मन मोहनी, प्यारी राधा प्यारी की॥

पद 1

श्याम विहारिनि श्याम अधीना, नित्य निकुंज विहारिनि। संग सखी सब गावत गीता, प्रीति की रीति निभावन हारी की॥

पद 2

मोर मुकुट पीताम्बर सोहे, कुण्डल की छवि न्यारी। गल वैजन्ती माल विराजत, रति की छवि पर वारी॥

पद 3

यमुना तट पर रास रचावत, संग सखा सखियन के। नृत्य करत बजावत मुरली, मोहत मन गोकुल के॥

पद 4

श्री राधा जी की आरती, जो कोई नर गावे। कहत पदम दास स्वामी, मनवांछित फल पावे॥

सामान्य प्रश्न

श्री राधा की आरती कब गाई जाती है? +

श्री राधा की आरती पूजा के अन्त में गाई जाती है, सुबह या शाम दोनों समय। दीपक या कपूर की ज्योत से देवता के समक्ष आरती उतारी जाती है।

श्री राधा की आरती का टेक क्या है? +

श्री राधा की आरती का टेक है: "आरती श्री वृषभानु लली की।", जिसे हर पद के बाद दोहराया जाता है।

क्या श्री राधा की आरती पूरी हिंदी में उपलब्ध है? +

हाँ, इस पृष्ठ पर श्री राधा की आरती के सभी 4 पद पूरे हिंदी में दिए गए हैं।

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