आरती
श्री सरस्वती की आरती
जय सरस्वती माता
टेक (हर पद के बाद दोहराएँ)
जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता। सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥
पद 1
चन्द्रवदनी पद्मासिनी, द्युति मंगलकारी। सोहत शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥
पद 2
बाएँ कर में वीणा, दाएँ कर माला। शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥
पद 3
देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया। पैठि मंथरा दासी, रावण संहार किया॥
पद 4
विद्या ज्ञान प्रदायिनी, ज्ञान प्रकाश भरो। मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो॥
पद 5
धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो। ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥
पद 6
माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे। हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे॥
सामान्य प्रश्न
श्री सरस्वती की आरती कब गाई जाती है? +
श्री सरस्वती की आरती पूजा के अन्त में गाई जाती है, सुबह या शाम दोनों समय। दीपक या कपूर की ज्योत से देवता के समक्ष आरती उतारी जाती है।
श्री सरस्वती की आरती का टेक क्या है? +
श्री सरस्वती की आरती का टेक है: "जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।", जिसे हर पद के बाद दोहराया जाता है।
क्या श्री सरस्वती की आरती पूरी हिंदी में उपलब्ध है? +
हाँ, इस पृष्ठ पर श्री सरस्वती की आरती के सभी 6 पद पूरे हिंदी में दिए गए हैं।
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