मुख्य सामग्री पर जाएँ

आरती

श्री पार्वती की आरती

जय पार्वती माता

टेक (हर पद के बाद दोहराएँ)

जय पार्वती माता, मैया जय पार्वती माता। ब्रह्मा सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥

पद 1

अरिकुल पद्म विनाशिनी, जय सेवक त्राता। जग जीवन जगदम्बा, हरिहर गुण गाता॥

पद 2

सिंह को वाहन साजे, कुण्डल हैं साथा। देव वधू जो सेवत, नित उनके पाता॥

पद 3

सतयुग रूप शील अति सुन्दर, नाम सती कहलाया। हेमाचल घर जन्मीं, सचा मैना माता॥

पद 4

शुम्भ निशुम्भ विदारे, हेमाचल स्थाता। सहस भुजा तनु धरिके, चक्रहि लिए आता॥

पद 5

सृष्टि रूप तुहीं है, जननी शिव संगा। महेश्वरी माँ तुम सब की, दुख हरनी माता॥

पद 6

पार्वती माता की आरती, जो कोई जन गावे। रिद्धि सिद्धि धन पावे, मोक्ष फल पावे॥

सामान्य प्रश्न

श्री पार्वती की आरती कब गाई जाती है? +

श्री पार्वती की आरती पूजा के अन्त में गाई जाती है, सुबह या शाम दोनों समय। दीपक या कपूर की ज्योत से देवता के समक्ष आरती उतारी जाती है।

श्री पार्वती की आरती का टेक क्या है? +

श्री पार्वती की आरती का टेक है: "जय पार्वती माता, मैया जय पार्वती माता।", जिसे हर पद के बाद दोहराया जाता है।

क्या श्री पार्वती की आरती पूरी हिंदी में उपलब्ध है? +

हाँ, इस पृष्ठ पर श्री पार्वती की आरती के सभी 6 पद पूरे हिंदी में दिए गए हैं।

← पूरा आरती संग्रह देखें

अपनी कुंडली जानें

जन्म विवरण भरें: स्कोर मुफ़्त में मिलेगा। पूरी रिपोर्ट आपके ईमेल पर भेजी जाएगी।

सटीक खगोलीय गणना · कोई स्पैम नहीं · गोपनीयता