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आरती

श्री शनि देव की आरती

जय जय श्री शनिदेव

टेक (हर पद के बाद दोहराएँ)

जय जय श्री शनिदेव, भक्तन हितकारी। सूर्य पुत्र प्रभु छाया, महतारी प्यारी॥

पद 1

श्याम अंग वक्र दृष्टि, चतुर्भुजा धारी। नीलाम्बरधर नीलमय, छवि अति प्यारी॥

पद 2

किरीट मुकुट छत्र, चमर कर धारी। कर में शस्त्र त्रिशूला, गदा वर धारी॥

पद 3

परिधान पीत काषाय, मालिन्य विहीना। भक्तन की पीड़ा हरता, प्रभु शरण गहीना॥

पद 4

सूर्यपुत्र शनि की आरती, जो कोई नर गावे। कहत कवीश्वर सुख सम्पत्ति, मनवांछित फल पावे॥

सामान्य प्रश्न

श्री शनि देव की आरती कब गाई जाती है? +

श्री शनि देव की आरती पूजा के अन्त में गाई जाती है, सुबह या शाम दोनों समय। दीपक या कपूर की ज्योत से देवता के समक्ष आरती उतारी जाती है।

श्री शनि देव की आरती का टेक क्या है? +

श्री शनि देव की आरती का टेक है: "जय जय श्री शनिदेव, भक्तन हितकारी।", जिसे हर पद के बाद दोहराया जाता है।

क्या श्री शनि देव की आरती पूरी हिंदी में उपलब्ध है? +

हाँ, इस पृष्ठ पर श्री शनि देव की आरती के सभी 4 पद पूरे हिंदी में दिए गए हैं।

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