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कृष्ण मंत्र

कृष्ण वंदना

भगवान कृष्ण

कृष्ण के प्रति समर्पण और उनकी लीलाओं का स्मरण कराने वाला श्लोक।

कब जपें

जन्माष्टमी पर, या कृष्ण पूजा के समय।

श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्। देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥

उच्चारण (रोमन)

Vasudevasutam Devam Kamsachaanoora-Mardanam, Devaki-Paramaanandam Krishnam Vande Jagadgurum.

हिंदी में अर्थ

वसुदेव के पुत्र, कंस और चाणूर के संहारक, देवकी को परम आनंद देने वाले जगद्गुरु कृष्ण को मैं नमन करता हूँ।

श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

आकाशात् पतितं तोयं यथा गच्छति सागरम्। सर्वदेव नमस्कारः केशवं प्रतिगच्छति॥

उच्चारण (रोमन)

Akashaat Patitam Toyam Yathaa Gacchati Saagaram, Sarvadeva Namaskaaraha Keshavam Pratigacchati.

हिंदी में अर्थ

जैसे आकाश से गिरी हर बूँद अंततः समुद्र में जा मिलती है, वैसे ही किसी भी देवता को किया गया नमन अंततः केशव (कृष्ण) तक ही पहुँचता है।

सामान्य प्रश्न

कृष्ण वंदना क्या है और इसका क्या महत्व है? +

कृष्ण के प्रति समर्पण और उनकी लीलाओं का स्मरण कराने वाला श्लोक।

कृष्ण वंदना कब जपना चाहिए? +

जन्माष्टमी पर, या कृष्ण पूजा के समय।

कृष्ण वंदना का अर्थ क्या है? +

वसुदेव के पुत्र, कंस और चाणूर के संहारक, देवकी को परम आनंद देने वाले जगद्गुरु कृष्ण को मैं नमन करता हूँ।

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