हनुमान मंत्र
हनुमान वंदना
श्री हनुमान
शक्ति, साहस और भय से रक्षा के लिए हनुमान जी की स्तुति।
कब जपें
मंगलवार और शनिवार को, या किसी संकट के समय।
श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शिरसा नमामि॥
उच्चारण (रोमन)
Manojavam Marutatulyavegam Jitendriyam Buddhimataam Varishtham, Vaataatmajam Vaanarayoothamukhyam Shri Ramaduutam Shirasaa Namaami.
हिंदी में अर्थ
मन के समान वेग वाले, वायु-पुत्र, इंद्रियों को जीतने वाले, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, वानरों के सेनापति, और श्रीराम के दूत हनुमान को मैं सिर झुकाकर नमन करता हूँ।
श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥
उच्चारण (रोमन)
Atulitabaladhaamam Hemashailaabhadeham Danujavanakrishaanum Jnaaninaamagraganyam, Sakalagunanidhaanam Vaanaraanaamadheesham Raghupatipriyabhaktam Vaatajaatam Namaami.
हिंदी में अर्थ
अतुलनीय बल के धाम, सोने के पर्वत जैसी काया वाले, राक्षसरूपी वन के लिए अग्नि-समान, ज्ञानियों में अग्रगण्य, सद्गुणों की खान, वानरों के स्वामी, और रघुनाथ के प्रिय भक्त वायुपुत्र हनुमान को नमन।
सामान्य प्रश्न
हनुमान वंदना क्या है और इसका क्या महत्व है? +
शक्ति, साहस और भय से रक्षा के लिए हनुमान जी की स्तुति।
हनुमान वंदना कब जपना चाहिए? +
मंगलवार और शनिवार को, या किसी संकट के समय।
हनुमान वंदना का अर्थ क्या है? +
मन के समान वेग वाले, वायु-पुत्र, इंद्रियों को जीतने वाले, बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, वानरों के सेनापति, और श्रीराम के दूत हनुमान को मैं सिर झुकाकर नमन करता हूँ।
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