शांति मंत्र
शांति मंत्र
ईश्वर
सामूहिक शांति, सद्भाव और कल्याण की कामना करने वाला मंत्र, हर पाठ या पूजा के अंत में बोला जाता है।
कब जपें
किसी भी पाठ, पूजा या हवन के अंत में।
श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
उच्चारण (रोमन)
Om Saha Naavavatu, Saha Nau Bhunaktu, Saha Veeryam Karavaavahai, Tejasvinaa-Vadhiitam-Astu Maa Vidvishaavahai, Om Shantih Shantih Shantih.
हिंदी में अर्थ
हम दोनों की साथ रक्षा हो, हम दोनों को साथ फल मिले, हम साथ मिलकर पुरुषार्थ करें। हमारा अध्ययन तेजस्वी हो, हमारे बीच द्वेष कभी न हो। सर्वत्र शांति हो।
श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
ॐ सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु। सर्वेषां शान्तिर्भवतु। सर्वेषां पूर्णं भवतु। सर्वेषां मंगलं भवतु। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
उच्चारण (रोमन)
Om Sarveshaam Svastir-Bhavatu, Sarveshaam Shaantir-Bhavatu, Sarveshaam Poornam Bhavatu, Sarveshaam Mangalam Bhavatu, Om Shantih Shantih Shantih.
हिंदी में अर्थ
सबका कल्याण हो, सबको शांति मिले, सबका जीवन पूर्ण हो, सबका मंगल हो। सर्वत्र शांति हो।
श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु। मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
उच्चारण (रोमन)
Om Sarve Bhavantu Sukhinah, Sarve Santu Niraamayaah, Sarve Bhadraani Pashyantu, Maa Kashchid-Duhkha-Bhaag-Bhavet, Om Shantih Shantih Shantih.
हिंदी में अर्थ
सब सुखी रहें, सब निरोगी रहें, सब मंगल देखें, कोई भी दुखी न रहे। सर्वत्र शांति हो।
सामान्य प्रश्न
शांति मंत्र क्या है और इसका क्या महत्व है? +
सामूहिक शांति, सद्भाव और कल्याण की कामना करने वाला मंत्र, हर पाठ या पूजा के अंत में बोला जाता है।
शांति मंत्र कब जपना चाहिए? +
किसी भी पाठ, पूजा या हवन के अंत में।
शांति मंत्र का अर्थ क्या है? +
हम दोनों की साथ रक्षा हो, हम दोनों को साथ फल मिले, हम साथ मिलकर पुरुषार्थ करें। हमारा अध्ययन तेजस्वी हो, हमारे बीच द्वेष कभी न हो। सर्वत्र शांति हो।
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