शांति मंत्र
पूर्णमदः शांति मंत्र
ब्रह्म
ईशावास्य उपनिषद का आरंभिक मंत्र, ब्रह्म की अनंत और अखंड प्रकृति का बोध कराता है।
कब जपें
किसी भी उपनिषद पाठ, सत्संग या ध्यान के आरंभ में।
संस्कृत श्लोक
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
उच्चारण (रोमन)
Om Purnamadah Purnamidam Purnat Purnamudachyate, Purnasya Purnamadaya Purnamevavashishyate. Om Shantih Shantih Shantih.
हिंदी में अर्थ
वह (ब्रह्म) पूर्ण है, यह (सृष्टि) भी पूर्ण है, पूर्ण से पूर्ण ही उत्पन्न होता है। पूर्ण में से पूर्ण निकाल लेने पर भी पूर्ण ही शेष रहता है। यह मंत्र ब्रह्म की अखंड, अनंत प्रकृति की ओर संकेत करता है।
सामान्य प्रश्न
पूर्णमदः शांति मंत्र क्या है और इसका क्या महत्व है? +
ईशावास्य उपनिषद का आरंभिक मंत्र, ब्रह्म की अनंत और अखंड प्रकृति का बोध कराता है।
पूर्णमदः शांति मंत्र कब जपना चाहिए? +
किसी भी उपनिषद पाठ, सत्संग या ध्यान के आरंभ में।
पूर्णमदः शांति मंत्र का अर्थ क्या है? +
वह (ब्रह्म) पूर्ण है, यह (सृष्टि) भी पूर्ण है, पूर्ण से पूर्ण ही उत्पन्न होता है। पूर्ण में से पूर्ण निकाल लेने पर भी पूर्ण ही शेष रहता है। यह मंत्र ब्रह्म की अखंड, अनंत प्रकृति की ओर संकेत करता है।
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