जैन मंत्र
णमोकार मंत्र
पंच परमेष्ठी
जैन परंपरा का सबसे पवित्र मंत्र, पाँच परम आत्माओं को नमन करते हुए सभी पापों के नाश की कामना करता है।
कब जपें
दिन की शुरुआत में, ध्यान से पहले, या किसी भी शुभ कार्य से पहले।
संस्कृत श्लोक
ॐ णमो अरिहंताणं। णमो सिद्धाणं। णमो आयरियाणं। णमो उवज्झायाणं। णमो लोए सव्व साहूणं॥ एसो पंच णमोक्कारो, सव्व पावप्पणासणो। मंगलाणं च सव्वेसिं, पढमं हवई मंगलम्॥
उच्चारण (रोमन)
Om Namo Arihantanam. Namo Siddhanam. Namo Ayariyanam. Namo Uvajjhayanam. Namo Loye Savva Sahunam. Eso Pancha Namokkaro, Savva Pava-Ppanasano, Mangalanam Cha Savvesim, Padhamam Havai Mangalam.
हिंदी में अर्थ
अरिहंतों को नमन, सिद्धों को नमन, आचार्यों को नमन, उपाध्यायों को नमन, संसार के सभी साधुओं को नमन। यह पाँच नमन सभी पापों का नाश करने वाला है, और सभी मंगलों में सबसे प्रथम मंगल है।
सामान्य प्रश्न
णमोकार मंत्र क्या है और इसका क्या महत्व है? +
जैन परंपरा का सबसे पवित्र मंत्र, पाँच परम आत्माओं को नमन करते हुए सभी पापों के नाश की कामना करता है।
णमोकार मंत्र कब जपना चाहिए? +
दिन की शुरुआत में, ध्यान से पहले, या किसी भी शुभ कार्य से पहले।
णमोकार मंत्र का अर्थ क्या है? +
अरिहंतों को नमन, सिद्धों को नमन, आचार्यों को नमन, उपाध्यायों को नमन, संसार के सभी साधुओं को नमन। यह पाँच नमन सभी पापों का नाश करने वाला है, और सभी मंगलों में सबसे प्रथम मंगल है।
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