शिव मंत्र
महामृत्युंजय मंत्र
भगवान शिव
रोग, भय और अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए जपा जाने वाला संजीवनी मंत्र।
कब जपें
सोमवार या प्रदोष के दिन, बीमारी में या शिवलिंग पर जलाभिषेक करते समय।
संस्कृत श्लोक
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
उच्चारण (रोमन)
Om Tryambakam Yajamahe Sugandhim Pushtivardhanam, Urvarukamiva Bandhanan Mrityor Mukshiya Maamritat.
हिंदी में अर्थ
हम तीन नेत्रों वाले, सुगंधित और सबका पोषण करने वाले शिव की आराधना करते हैं। जैसे पका फल बेल से अपने आप अलग हो जाता है, वैसे ही वे हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त कर अमरता की ओर ले जाएँ।
सामान्य प्रश्न
महामृत्युंजय मंत्र क्या है और इसका क्या महत्व है? +
रोग, भय और अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए जपा जाने वाला संजीवनी मंत्र।
महामृत्युंजय मंत्र कब जपना चाहिए? +
सोमवार या प्रदोष के दिन, बीमारी में या शिवलिंग पर जलाभिषेक करते समय।
महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ क्या है? +
हम तीन नेत्रों वाले, सुगंधित और सबका पोषण करने वाले शिव की आराधना करते हैं। जैसे पका फल बेल से अपने आप अलग हो जाता है, वैसे ही वे हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त कर अमरता की ओर ले जाएँ।
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