उपनिषद और वेदांत
ईशावास्यम् मंत्र
ब्रह्म
ईशावास्य उपनिषद का पहला श्लोक, त्याग भाव से जीवन जीने और लोभ से दूर रहने की शिक्षा देता है।
कब जपें
स्वाध्याय के समय, या जब मन में अत्यधिक लोभ या मोह उठे।
संस्कृत श्लोक
ॐ ईशा वास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्। तेन त्यक्तेन भुञ्जीथाः मा गृधः कस्यस्विद्धनम्॥
उच्चारण (रोमन)
Om Ishaa Vaasyam-Idam Sarvam Yat-Kincha Jagatyaam Jagat, Tena Tyaktena Bhunjeethaah Maa Gridhah Kasyasvid-Dhanam.
हिंदी में अर्थ
यह सम्पूर्ण जगत, जो कुछ भी चराचर है, ईश्वर से व्याप्त है। इसलिए त्याग भाव से इसका उपभोग करो, और किसी और के धन का लोभ मत करो।
सामान्य प्रश्न
ईशावास्यम् मंत्र क्या है और इसका क्या महत्व है? +
ईशावास्य उपनिषद का पहला श्लोक, त्याग भाव से जीवन जीने और लोभ से दूर रहने की शिक्षा देता है।
ईशावास्यम् मंत्र कब जपना चाहिए? +
स्वाध्याय के समय, या जब मन में अत्यधिक लोभ या मोह उठे।
ईशावास्यम् मंत्र का अर्थ क्या है? +
यह सम्पूर्ण जगत, जो कुछ भी चराचर है, ईश्वर से व्याप्त है। इसलिए त्याग भाव से इसका उपभोग करो, और किसी और के धन का लोभ मत करो।
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