नक्षत्र
पुष्य नक्षत्र
पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि हैं और इसका प्रतीक पुष्प है। यह देव गण, मध्य नाड़ी और भेड़ योनि का है। गुण मिलान में गण, नाड़ी और योनि कूट सीधे इन्हीं पर आधारित होते हैं।
- स्वामी ग्रह
- शनि
- गण
- देव
- नाड़ी
- मध्य
- योनि
- भेड़
- प्रतीक
- पुष्प
- देवता
- बृहस्पति
पद, अंश और शुभ अक्षर
| पद | अंश (डिग्री) | शुभ अक्षर |
|---|---|---|
| पद 1 | 93°20' – 96°40' | हू Hu |
| पद 2 | 96°40' – 100° | हे He |
| पद 3 | 100° – 103°20' | हो Ho |
| पद 4 | 103°20' – 106°40' | डा Da |
योनि कूट
पुष्य नक्षत्र की योनि भेड़ (Sheep) है। गुण मिलान में योनि कूट (अधिकतम 4 अंक) दो व्यक्तियों की शारीरिक और सहज अनुकूलता का आकलन करता है।
भेड़ योनि की वैर-जोड़ी बंदर योनि है। इन दो योनियों की जोड़ी को योनि कूट में 0 अंक मिलते हैं।
भेड़ योनि के अन्य नक्षत्र:
गुण मिलान में गण की भूमिका
देव · मनुष्य: यह जोड़ी गण कूट में सामान्यतः ठीक मानी जाती है, बड़ी बाधा की आशंका कम रहती है।
देव · राक्षस: देव और राक्षस गण की जोड़ी को परंपरागत रूप से गण दोष का संकेत माना जाता है, पूर्ण कुंडली मिलान में इसकी विस्तृत जाँच ज़रूरी है।
सामान्य प्रश्न
पुष्य नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है? +
पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि हैं।
पुष्य नक्षत्र किस गण और नाड़ी का है? +
पुष्य नक्षत्र देव गण और मध्य नाड़ी का है। गुण मिलान में गण और नाड़ी कूट सीधे इन्हीं पर आधारित होते हैं।
पुष्य नक्षत्र का प्रतीक और देवता क्या है? +
पुष्य नक्षत्र का प्रतीक पुष्प है और इसके देवता बृहस्पति हैं।
पुष्य नक्षत्र की योनि कौन सी है? +
पुष्य नक्षत्र की योनि भेड़ है। योनि कूट में इसका वैर-जोड़ी बंदर योनि है।
पुष्य नक्षत्र से बच्चे का नाम किस अक्षर से रखें? +
पुष्य नक्षत्र के चार पदों के शुभ अक्षर हैं: पद 1: हू, पद 2: हे, पद 3: हो, पद 4: डा।
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