नक्षत्र
मूल नक्षत्र
मूल नक्षत्र के स्वामी केतु हैं और इसका प्रतीक जड़ें है। यह राक्षस गण, आदि नाड़ी और कुत्ता योनि का है। गुण मिलान में गण, नाड़ी और योनि कूट सीधे इन्हीं पर आधारित होते हैं।
- स्वामी ग्रह
- केतु
- गण
- राक्षस
- नाड़ी
- आदि
- योनि
- कुत्ता
- प्रतीक
- जड़ें
- देवता
- निरृति
पद, अंश और शुभ अक्षर
| पद | अंश (डिग्री) | शुभ अक्षर |
|---|---|---|
| पद 1 | 240° – 243°20' | ये Ye |
| पद 2 | 243°20' – 246°40' | यो Yo |
| पद 3 | 246°40' – 250° | भा Bha |
| पद 4 | 250° – 253°20' | भी Bhi |
योनि कूट
मूल नक्षत्र की योनि कुत्ता (Dog) है। गुण मिलान में योनि कूट (अधिकतम 4 अंक) दो व्यक्तियों की शारीरिक और सहज अनुकूलता का आकलन करता है।
कुत्ता योनि की वैर-जोड़ी हिरन योनि है। इन दो योनियों की जोड़ी को योनि कूट में 0 अंक मिलते हैं।
कुत्ता योनि के अन्य नक्षत्र:
गुण मिलान में गण की भूमिका
राक्षस · देव: देव और राक्षस गण की जोड़ी को परंपरागत रूप से गण दोष का संकेत माना जाता है, पूर्ण कुंडली मिलान में इसकी विस्तृत जाँच ज़रूरी है।
राक्षस · मनुष्य: यह जोड़ी गण कूट में सामान्यतः ठीक मानी जाती है, बड़ी बाधा की आशंका कम रहती है।
सामान्य प्रश्न
मूल नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है? +
मूल नक्षत्र के स्वामी केतु हैं।
मूल नक्षत्र किस गण और नाड़ी का है? +
मूल नक्षत्र राक्षस गण और आदि नाड़ी का है। गुण मिलान में गण और नाड़ी कूट सीधे इन्हीं पर आधारित होते हैं।
मूल नक्षत्र का प्रतीक और देवता क्या है? +
मूल नक्षत्र का प्रतीक जड़ें है और इसके देवता निरृति हैं।
मूल नक्षत्र की योनि कौन सी है? +
मूल नक्षत्र की योनि कुत्ता है। योनि कूट में इसका वैर-जोड़ी हिरन योनि है।
मूल नक्षत्र से बच्चे का नाम किस अक्षर से रखें? +
मूल नक्षत्र के चार पदों के शुभ अक्षर हैं: पद 1: ये, पद 2: यो, पद 3: भा, पद 4: भी।
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