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मुहूर्त · विवाह

विवाह मुहूर्त

अगले 90 दिनों में विवाह के लिए सबसे शुभ दिन कौन-से हैं, यह जानें। हर दिन का 0-100 स्कोर, उत्तम/शुभ/ठीक/सावधानी के साथ।

शुभ नक्षत्र

रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद, रेवती।

अशुभ नक्षत्र

भरणी, कृत्तिका, आर्द्रा, आश्लेषा, विशाखा, ज्येष्ठा और शतभिषा, विवाह के लिए टाले जाते हैं।

वार का नियम

मंगलवार आमतौर पर टाला जाता है; रविवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार सबसे अनुकूल माने जाते हैं।

और ध्यान देने योग्य

  • रिक्ता तिथि (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) और अमावस्या को विवाह नहीं रखा जाता, चाहे नक्षत्र अनुकूल हो।
  • चातुर्मास (आषाढ़ से कार्तिक) और अधिक मास में विवाह परंपरागत रूप से नहीं होते; माघ, फाल्गुन, वैशाख और ज्येष्ठ इसके लिए शुभ महीने माने जाते हैं।
  • गुरु (बृहस्पति) और शुक्र का अस्त होना (तारा-अस्त) विवाह के लिए टाला जाता है; यह उपकरण दिन का स्कोर देता है, पर अस्त-काल की जाँच पंडित से करवाएँ।

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सामान्य प्रश्न

विवाह मुहूर्त से जुड़े सवाल

क्या यह उपकरण दुल्हा-दुल्हन दोनों की कुंडली से मुहूर्त निकालता है?

नहीं, यह उपकरण केवल दिन का शुभ-अशुभ स्कोर देता है। दोनों की कुंडली के अनुसार तारा बला और दशा-अंतरदशा जोड़ने के लिए हमारा `/kundli-matching` उपयोग करें।

चातुर्मास में शादी क्यों नहीं होती?

चातुर्मास (आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक) देवशयन का काल माना जाता है, इसलिए विवाह जैसे शुभ कार्य अगले शुभ मास तक टाले जाते हैं।

गुरु/शुक्र के अस्त (तारा-अस्त) की जाँच कैसे करें?

हर पंचांग/पंडित इसकी सूची रखता है; इस अवधि में विवाह परंपरागत रूप से नहीं होते, चाहे स्कोर कुछ भी हो। हम भविष्य में इस जाँच को उपकरण में जोड़ने पर विचार कर रहे हैं।

क्या नाम या नक्षत्र के मेल के बिना केवल तारीख देखना काफ़ी है?

दिन का चुनाव एक हिस्सा है। पूरा शुभ मुहूर्त निकालने के लिए लग्न, अभिजित मुहूर्त और चौघड़िया भी देखे जाते हैं; बड़े परिवारों में पंडित की उपस्थिति में अंतिम समय तय होता है।