मंगला गौरी व्रत सावन मास के हर मंगलवार को रखा जाता है। यह मुख्य रूप से उत्तर और पश्चिम भारत में विवाहित महिलाओं द्वारा पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है, और नवविवाहित महिलाओं के पहले सावन में इसका विशेष महत्व माना जाता है।

उत्तर भारत (पूर्णिमांत कैलेंडर)

2026 में सावन मास 30 जुलाई से 28 अगस्त तक है। इस दौरान मंगला गौरी व्रत की तारीखें:

  • 4 अगस्त (पहला मंगलवार)
  • 11 अगस्त (दूसरा मंगलवार, इसी दिन सावन शिवरात्रि भी है)
  • 18 अगस्त (तीसरा मंगलवार)
  • 25 अगस्त (चौथा मंगलवार)

दक्षिण और पश्चिम भारत (अमांत कैलेंडर)

गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के अमांत कैलेंडर के अनुसार श्रावण मास 13 अगस्त से 11 सितंबर तक है। इस हिसाब से मंगला गौरी व्रत की तारीखें:

  • 18, 25 अगस्त
  • 1, 8 सितंबर

पूजा विधि

व्रत के दिन मां गौरी और भगवान शिव की पूजा की जाती है, सुहाग की सामग्री अर्पित की जाती है और मंगला गौरी व्रत कथा सुनी जाती है।

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यह जानकारी वर्णनात्मक है।